िहन्दी ब्लॉग
एपिसोद ६ अब्दुल वहीद खानअब्दुल वहीद खान तारदेव की एक गली में अपनी कैब के पास छाया में खड़े थे। यह बीच दोपहर का वह अरसा था जब छोटी सी ख़ामोशी के बीच में ज़्यादा जगह महसूस होती है और लगता है कि जैसे शहर शाम के हल्ले-गुल्ले की तरफ़ जाने से पहले साँस ले रहा हो। अब्दुल वहीद खान कहानियों से भरे हुये हैं। वो एक के बाद दूसरी बुनते रहे। मैंने दो कहानियाँ पोडकास्ट में रखी हैं और बाकी आउटटेक में हैं। पोडकास्ट में की एक कहानी मुझे ख़ास तौर पर मज़ा आया क्योंकि, बहुत पहले, बम्बई से 12,000 किलोमीटर दूर, एक और बड़े और फैले हुये शहर में, मुझे भी वही अनुभव हुआ था जब मैं टैक्सी चलाती थी। अब्दुल वहीद खान को वो बदलाव पसंद नहीं आते हैं जो वो इस शहर में देखते हैं जिसमें वो 30 साल से रह रहे हैं। वो अपने बेटे के बारे में बताते हैं जो 12 वीं क्लास में है और हम बोर्ड के इम्तिहानों का फ़ख़्र और टेन्शन सुनते हैं। पोडकास्ट सुनने के लिये नीचे बने प्लेयर के आयकन पर क्लिक करें या इसके नीचे की दो लिंकों के चुनाव पर, और नीचे उनकी तस्वीर के बाद के प्लेयर के आयकनों पर क्लिक करें ऒर आउटटेक्स सुनें।ट्रान्सक्रिप्ट डाउनलोड करने के लिये यहाँ क्लिक करें। पोडकास्ट डाउनलोड करने के लिये यहाँ राइट क्लिक करें।
अब्दुल वहीद खान “हमारा दिल बहुत सादिक दिल था।”धोखा देने वालों की कहानियों के आउटटेकयह आउटटेक एक ऐसे धोखेबाज़ के बारे में एक लंबी कहानी है जिसने ख़ुद को एक ‘दो नम्बरी’ आदमी की तरह पेश किया लेकिन ख़ुद को एक नम्बरी कर दिया (5 मिनट 2 सेकण्ड)
यह आउटटेक किसी ऐसे आदमी के बारे में एक कहानी है जिसने भाड़ा नहीं चुकाने की कोशिश करी, लेकिन फिर व्यक्तिगत तौर पर भाड़ा चुकाया जब वो पकड़ा और पीटा गया। लेकिन जैसा कि बम्बई में अक्सर होता है, उसे चौकी ले जाना बहुत मुश्किल था (1 मिनट 29 सेकण्ड)
वह बैंक जिसने खरीदारी पर कर्ज़ दिया हैऔर आउटटेक (ये धोखेबाज़ों के बारे में नहीं हैं)अब्दुल वहीद खान बहुत भावनाओं के साथ ख़ुदा और ज़िंदगी के बारे में बात करते हैं। (3 मिनट 12 सेकण्ड)
अब्दुल वहीद खान का नाख़ुश होना बम्बई में हो रहे जिंसी बदलावों के बारे में उतना नहीं है। वो पाते हैं कि लोगों के दिल में बहुत कुछ बदल गया है। इसमें मैंने बातचीत के दो हिस्सों को एक संपूर्ण पूरे में जोड़ दिया है (3 मिनट 55 सेकण्ड)अब्दुल वहीद खान और उनकी पत्नी यू पी की कमी महसूस करते हैं। वो किसी दिन वहाँ वापस जाना चाहते हैं और खेती करना चाहते हैं। वो कहते हैं कि वहाँ का पानी हिन्दुस्तान में सबसे अच्छा है। छः बीधा का चौथाई हिस्सा? और अगर उनके आने वाले पोते यहाँ बम्बई में हों? स्थानांतरण किसी को दो हिस्सों में बाँट देता है। कहीं पर एक घर है और फिर कहीं और एक दूसरा घर है। (1 मिनट 55 सेकण्ड)
रावत पिछली पोडकास्टों को ट्रांसक्राइब कर रहा है। मैंने हिन्दी ट्रांसक्रिप्ट पन्ने पर गुप्ता जी के एपीसोड की ट्रांसक्रिप्ट भी जोड़ दी है। उसके अच्छे प्रयासों और उसकी उत्कृष्ट प्रवीणताओं से रिलीज़ की जा चुकी सभी पोडकास्टों के लिये डाउनलोड जल्दी ही होंगें। मैं उसकी बहुत आभारी हूँ और हमेशा रहूँगी। अगर आप उसे कुछ लिखना चाहें तो आप यहाँ कमेण्ट लिख सकते हैं या उसे vsrawat (at) gmail (dot) com पर ई–मेल भेज सकते हैं।इस पोडकास्ट का इण्ट्रो म्यूज़िक फ़िल्म टैक्सी 9-2-11 के गाने बम्बई नगरी से लिया गया है। इसे भप्पी लहरी¸ मेरिएन¸ निशा और विशाल ददलानी ने गाया है। संगीत विशाल ददलानी और शेखर ने दिया है और बोल विशाल ददलानी और देव कोहली के हैं।
एपिसोद ५ सुभाष चंदमैं नल बाज़ार में थी जब मैंने एक टैक्सी देखी जिस पर लिखे बड़े–बड़े नीले अक्षर बोल रहे थे ‘Time is Money’ (वक़्त ही पैसा है)। वह सुभाष चंद की टैक्सी थी। शाम होने जा रही थी और जब तक हम वापस आये तब तक अँधेरा हो चुका था। उसने छत की फ़्ल्योरेसेण्ट नीली बत्ती जला दी और मैंने उसकी फ़ोटो खींची। जितने लोगों से मैंने अब तक बात की है उनमें से वह पहला ऐसा ड्रायवर है जिसके पास न तो गाँव में कोई ज़मीन है और न ही उसकी शादी हुई है। वह हमें अपनी मुश्क़िल कहानी सुनाता है 23 साल की उम्र में बंबई आने की¸ ग्राण्ट रोड के फ़ुटपाथ पर रहने की¸ उस फ़ुटपाथ से उठने में मदद करने वाले एक सेठ की और ज़्यादा पैसा कमाने के लिये साउदी जाने की अपनी तमन्ना की। उसे टैक्सी ड्रायविंग में कोई भविष्य नहीं दिखता है। पोडकास्ट सुनने के लिये नीचे बने प्लेयर के आयकन पर क्लिक करें। नीचे स्क्रोल करें और आउटटेक्स सुनने के लिये उसकी तस्वीर के नीचे बने प्लेयर के आयकनों पर क्लिक करें।
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सुभाष चंद “वो (ऊपर वाला) जितने में रखेगा¸ उतने में ही रहना पड़ेगा”नल बाज़ार से जाते हुये हम तुलसी पाइप रोड वाले फ़्लायओवरों से गये। मैं तकरीबन हमेशा ट्रेन से जाती हूँ। कोई लम्बा अरसा गुज़रने के बाद किसी फ़्लायओवर पर जाने पर उतनी ऊँचाई से उस इलाके की स्कायलाइन में दिख रहे बदलावों पर मैं हमेशा चकित रह जाती हूँ। यह छोटा आउटटेक उन बदलावों और उस फ़्लायओवर के बारे में हमारी बातचीत है। (25 सेकण्ड) पिछले सभी ड्रायवरों की तरह वह भी वी टी फ़्लायओवर को पसंद करता है।
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तुलसी पाइप रोड फ़्लायओवर से ज्यूपिटर मिल 6 जुलाई 2006
तुलसी पाइप रोड फ़्लायओवर से ज्यूपिटर मिल 7 सितम्बर 2007सुभाष चंद कहता है कि सभी काली–पीली (टैक्सियाँ) 2010 तक जा चुकी होंगी। वह अपनी टैक्सी का और कुछ नहीं कर सकेगा सिवाय इसके कि वह इसे चोर बाज़ार में बेंच दे जहाँ वो इसे काट डालेंगे और इसके स्टील के वज़न के हिसाब से पैसे दे देंगे। वह यह यहाँ बताता है। (1 मिनट 20 सेकण्ड)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ राइट क्लिक करें
सुभाष चंद ने मुझे दो कहानियाँ सुनाईं। दोनों ही औरत पैसेंजरों¸ बियर और किसी सुझाव के बारे में थीं। उसका साफ़–साफ़ नहीं कहना कि उसका क्या मतलब है और उसकी लम्बी ख़ामोशियाँ मज़ेदार लगती हैं। इन ‘छोकरियों’ की कहानियाँ बहुत लम्बी हैं। (3 मिनट 47 सेकण्ड)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ राइट क्लिक करें
मैंने सुभाष चंद से पूछा कि वह बंबई में अभी–अभी आये हुये यू पी के किसी नौजवान लड़के को क्या सलाह देगा। उसकी सलाह टैक्सी चलाना नहीं थी। (1 मिनट 4 सेकण्ड)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ राइट क्लिक करें
<—एक पूरे फ़्रेम की खूबसूरत तस्वीर के लिये यहाँ क्लिक करें।सुभाष चंद को भी चाकू की नोक पर लूटा जा चुका है। दो बार। वह इसे इस आउटटेक में बताता है। (1 मिनट 21 सेकण्ड)
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जैसा कि आप देख सकते हैं¸ यह ब्लॉग अब हिन्दी में भी है। अंग्रेजी के इस ब्लॉग का हिन्दी में ट्रान्सलेशन फिर से इन्दौर के वी एस रावत का ख़ूबसूरत काम है। अगर आप उसे कुछ लिखना चाहें तो आप यहाँ कमेण्ट लिख सकते हैं या उसे vsrawat (at) gmail (dot) com पर ई–मेल भेज सकते हैं। मैं उसका बार–बार शुक्रिया अदा करती हूँ।इस पोडकास्ट का इण्ट्रो म्यूज़िक फ़िल्म टैक्सी 9-2-11 के गाने बम्बई नगरी से लिया गया है। इसे भप्पी लहरी¸ मेरिएन¸ निशा और विशाल ददलानी ने गाया है। संगीत विशाल ददलानी और शेखर ने दिया है और बोल विशाल ददलानी और देव कोहली के हैं।
एपिसोद ४ सेवालाल जयसवालएक दिन रास्ते में मैंने एक टैक्सी की पिछली विण्डस्क्रीन पर ‘सिटी टैक्सी यूनियन’ का लोगो लगा देखा। मैं जानना चाहती थी कि आजकल रोज़ हो रहे बदलावों और चुनौतियों के सामने ये यूनियनें टैक्सी ड्रायवरों की क्या मदद करती हैं¸ इसलिये मैं उस टैक्सी के ड्रायवर से मिली। वह सेवालाल जयसवाल था। वह मुझसे बात करने को राज़ी हो गया।फिर हमने इस बारे में भी बात करी लेकिन हमारी बातचीत इससे भी बहुत आगे तक गई। उसने बताया कि वह कहाँ रहता था¸ एक महाराष्ट्रियन लड़की से उसकी लव मैरिज कैसे हुई और आजकल जबकि ज़्यादातर लव मैरिज में से लव कुछ दिन बाद उड़ जाता है¸ उसकी लव मैरिज सफल कैसे हो पाई। उसने ऐसे पैंसेजर्स के बारे में बताया जो टैक्सी में सवार होकर पिछली सीट पर किसिंग और सेक्स करना चाहते हैं¸ और ऐसे पैंसेजर्स जो किराया चुकाये बिना भाग जाते हैं और उनसे वो कैसे निपटता है¸ और कुछ पैंसेजर्स ने तो उसे चाकू दिखाकर लूट लिया था। उसने लोअर परेल के इलाके में हो रही तब्दीलियों के बारे में अपना नज़रिया बताया जहाँ वह रहता है। उसने अपनी पन्द्रह साल पुरानी टैक्सी और अपनी नई प्रायवेट टैक्सी के बारे में बताया।लेकिन इतना सब कुछ इस पोडकास्ट में नहीं आ पाया क्योंकि दिक्कत वही थी – ऑडियो की लम्बाई। उनके लिये उन आउटटेक्स को सुनें जो सेवालाल की तस्वीर के नीचे हैं। पोडकास्ट को स्ट्रीम करने के लिये यहाँ प्लेयर पर क्लिक करें। (१९मिन ३५ सेक)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ पर राइट क्लिक करें। यहाँ पर डाउनलोड करें।िहंदी ट्रान्सक्रिप्ट्स डाउनलोड के लिये यहाँ पर क्लिक करें।
सेवालाल जयसवाल: हर आदमी का ख्वाहिस होता है। वही अपना भी है। कोई अलग ख्वाहिस नहीं है।
टैक्सी यूनियनों के बारे में भी बात होती रही। मैंने उससे पालिटिकल पार्टियों से जुड़ने के बारे में पूछा। बाकी बातचीत ये है: (१ मिन ९ सेक)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ पर राइट क्लिक करें
यह फ़्रण्ट सीट और डैशबोर्ड है। स्टीयरिंग व्हील का कवर प्लास्टिक का है और खूबसूरत होने के साथ साथ यह अच्छी ग्रिप भी देता है। लेकिन यह गियर का नॉब है जो मुझे पसंद आया। इसमें इन्द्रधनुष के बैकग्राउण्ड पर प्लास्टिक का एक लाल गुलाब जड़ा है जो खुद एक पारदर्शी कड़े प्लास्टिक में ढाला गया है। लाल–काला छपा मैटेरियल फ़ेयर कार्ड है। नारंगी बक्से में इसके बगल के गणपति के मंदिर के लिये अगरबत्तियाँ हैं। नीचे के आउटटेक में इस बारे में हमारी बातचीत है कि पन्द्रह साल पुरानी टैक्सियाँ चलना बंद करा दी जायेंगी। सेवालाल की टैक्सी पन्द्रह साल पुरानी है। (१ मिन ५० सेक)अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ पर राइट क्लिक करें
अभी तक किसी भी ड्रायवर ने ऐसी नई प्रायवेट टैक्सियों से खतरा महसूस नहीं किया है जो रास्तों पर दौड़ रही हैं। अभी तक उन सबने कहा है कि उन्हें बिजनेस कम होने का डर नहीं है क्योंकि ऐसे बहुत से लोग हैं जो ज़्यादा किराया नहीं दे सकते हैं। सेवालाल भी इस बात से सहमत है। लेकिन मुझे इतना भरोसा नहीं है। मैं जानती हूँ कि हर बार जब कोई सवारी प्रायवेट टैक्सी पर बैठती है तो काली–पीली टैक्सियों की एक सवारी कम हो जाती है। (१ मिन ५ सेक)
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सेवालाल कोई लॉटरी जीतने के बारे में कहता है कि
अभी डाउनलोड करके रखने और बाद को सुनने के लिये यहाँ पर राइट क्लिक करेंये सभी नई तब्दीलियाँ¸ हिन्दी में यह ब्लॉग पेज¸ पोडकास्ट का हिन्दी ट्रान्सक्रिप्ट¸ ये सब वी एस रावत ने ट्रान्सलेट और ट्रान्सक्राइब किये हैं जो इन्दौर में रहते हैं। आपको ट्रान्सक्रिप्ट देना भी उन्हीं का आयडिया था और उन्होंने काफ़ी सारे सुझाव भी दिये हैं।इस पोडकास्ट का इण्ट्रो म्यूज़िक फ़िल्म टैक्सी 9-2-11 के गाने बम्बई नगरी से लिया गया है। इसे भप्पी लहरी¸ मेरिएन¸ निशा और विशाल ददलानी ने गाया है। संगीत विशाल ददलानी और शेखर ने दिया है और बोल विशाल ददलानी और देव कोहली के हैं। उन सभी का शुक्रिया।




